श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.14.23

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

एतस्यां साध्वि सन्ध्यायां भगवान् भूतभावनः।

परीतो भूतपर्षद्भिर्वृषेणाटति भूतराट्॥ २३

etasyāṃ sādhvi sandhyāyāṃ bhagavān bhūtabhāvanaḥ|

parīto bhūtaparṣadbhirvṛṣeṇāṭati bhūtarāṭ|| 23

अर्थ

साध्वि! इस सन्ध्याकालमें भूतभावन भूतपति भगवान् शंकर अपने गण भूत-प्रेतादिको साथ लिये बैलपर चढ़कर विचरा करते हैं॥ २३॥

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