श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.13.3

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

चरितं तस्य राजर्षेरादिराजस्य सत्तम।

ब्रूहि मे श्रद्दधानाय विष्वक्सेनाश्रयो ह्यसौ॥ ३

caritaṃ tasya rājarṣerādirājasya sattama|

brūhi me śraddadhānāya viṣvaksenāśrayo hyasau|| 3

अर्थ

आप साधुशिरोमणि हैं। आप मुझे आदिराज राजर्षि स्वायम्भुव मनुका पवित्र चरित्र सुनाइये। वे श्रीविष्णुभगवान्‌के शरणापन्‍न थे, इसलिये उनका चरित्र सुननेमें मेरी बहुत श्रद्धा है॥ ३॥✎ 1306

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1306 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): श्रीविष्णु-भगवान्‌के → श्रीविष्णुभगवान्‌के

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