श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.33

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

स इत्थं गृणतः पुत्रान् पुरो दृष्ट्वा प्रजापतीन्।

प्रजापतिपतिस्तन्वं तत्याज व्रीडितस्तदा।

तां दिशो जगृहुर्घोरां नीहारं यद्विदुस्तमः॥ ३३

sa itthaṃ gṛṇataḥ putrān puro dṛṣṭvā prajāpatīn|

prajāpatipatistanvaṃ tatyāja vrīḍitastadā|

tāṃ diśo jagṛhurghorāṃ nīhāraṃ yadvidustamaḥ|| 33

अर्थ

अपने पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंको अपने सामने इस प्रकार कहते देख प्रजापतियोंके पति ब्रह्माजी बड़े लज्जित हुए और उन्होंने उस शरीरको उसी समय छोड़ दिया। तब उस घोर शरीरको दिशाओंने ले लिया। वही कुहरा हुआ, जिसे अन्धकार भी कहते हैं॥ ३३॥✎ 251

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #251 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें