श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.32

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्मै नमो भगवते य इदं स्वेन रोचिषा।

आत्मस्थं व्यञ्जयामास स धर्मं पातुमर्हति॥ ३२

tasmai namo bhagavate ya idaṃ svena rociṣā|

ātmasthaṃ vyañjayāmāsa sa dharmaṃ pātumarhati|| 32

अर्थ

जिन श्रीभगवान्‌ने अपने स्वरूपमें स्थित इस जगत‍्को अपने ही तेजसे प्रकट किया है, उन्हें नमस्कार है। इस समय वे ही धर्मकी रक्षा कर सकते हैं’॥ ३२॥✎ 251

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #251 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें