॥ श्रीहरिः ॥
रुद्राणां रुद्रसृष्टानां समन्ताद् ग्रसतां जगत्।
निशाम्यासंख्यशो यूथान् प्रजापतिरशङ्कत॥ १६
rudrāṇāṃ rudrasṛṣṭānāṃ samantād grasatāṃ jagat|
niśāmyāsaṃkhyaśo yūthān prajāpatiraśaṅkata|| 16
अर्थ
भगवान् रुद्रके द्वारा उत्पन्न हुए उन रुद्रोंको असंख्य यूथ बनाकर सारे संसारको भक्षण करते देख ब्रह्माजीको बड़ी शंका हुई॥ १६॥
रुद्राणां रुद्रसृष्टानां समन्ताद् ग्रसतां जगत्।
निशाम्यासंख्यशो यूथान् प्रजापतिरशङ्कत॥ १६
भगवान् रुद्रके द्वारा उत्पन्न हुए उन रुद्रोंको असंख्य यूथ बनाकर सारे संसारको भक्षण करते देख ब्रह्माजीको बड़ी शंका हुई॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 288) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/12/16/