श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.17

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

अलं प्रजाभिः सृष्टाभिरीदृशीभिः सुरोत्तम।

मया सह दहन्तीभिर्दिशश्‍चक्षुर्भिरुल्बणैः॥ १७

alaṃ prajābhiḥ sṛṣṭābhirīdṛśībhiḥ surottama|

mayā saha dahantībhirdiśaścakṣurbhirulbaṇaiḥ|| 17

अर्थ

तब उन्होंने रुद्रसे कहा—‘सुरश्रेष्ठ! तुम्हारी प्रजा तो अपनी भयंकर दृष्टिसे मुझे और सारी दिशाओंको भस्म किये डालती है; अतः ऐसी सृष्टि और न रचो॥ १७॥

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