लोकपिता ब्रह्माजीसे ऐसी आज्ञा पाकर भगवान् नीललोहित बल, आकार और स्वभावमें अपने ही जैसी प्रजा उत्पन्न करने लगे॥ १५॥
इत्यादिष्टः स गुरुणा भगवान्नीललोहितः।
सत्त्वाकृतिस्वभावेन ससर्जात्मसमाः प्रजाः॥ १५
लोकपिता ब्रह्माजीसे ऐसी आज्ञा पाकर भगवान् नीललोहित बल, आकार और स्वभावमें अपने ही जैसी प्रजा उत्पन्न करने लगे॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 288) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/12/15/