तुम उपर्युक्त नाम, स्थान और स्त्रियोंको स्वीकार करो और इनके द्वारा बहुत-सी प्रजा उत्पन्न करो; क्योंकि तुम प्रजापति हो’॥ १४॥
गृहाणैतानि नामानि स्थानानि च सयोषणः।
एभिः सृज प्रजा बह्वीः प्रजानामसि यत्पतिः॥ १४
तुम उपर्युक्त नाम, स्थान और स्त्रियोंको स्वीकार करो और इनके द्वारा बहुत-सी प्रजा उत्पन्न करो; क्योंकि तुम प्रजापति हो’॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.12.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 287) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/12/14/