श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.14

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

गृहाणैतानि नामानि स्थानानि च सयोषणः।

एभिः सृज प्रजा बह्वीः प्रजानामसि यत्पतिः॥ १४

gṛhāṇaitāni nāmāni sthānāni ca sayoṣaṇaḥ|

ebhiḥ sṛja prajā bahvīḥ prajānāmasi yatpatiḥ|| 14

अर्थ

तुम उपर्युक्त नाम, स्थान और स्त्रियोंको स्वीकार करो और इनके द्वारा बहुत-सी प्रजा उत्पन्‍न करो; क्योंकि तुम प्रजापति हो’॥ १४॥

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