श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 3.12.13

तृतीय स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

धीर्वृत्तिरुशनोमा५ च नियुत्सर्पिरिलाम्बिका।

इरावती सुधा दीक्षा रुद्राण्यो रुद्र ते स्त्रियः॥ १३

dhīrvṛttiruśanomā ca niyutsarpirilāmbikā|

irāvatī sudhā dīkṣā rudrāṇyo rudra te striyaḥ|| 13

अर्थ

तथा धी, वृत्ति, उशना, उमा, नियुत्, सर्पि, इला, अम्बिका, इरावती, सुधा और दीक्षा—ये ग्यारह रुद्राणियाँ तुम्हारी पत्नियाँ होंगी॥ १३॥

टिप्पणियाँ

  1. ५

    प्रा० पा०—धीवृत्तिरसरोमा च निजसर्पि०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 287)

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