दूसरी सृष्टि अहंकारकी है, जिससे पृथ्वी आदि पंचभूत एवं ज्ञानेन्द्रिय और कर्मेन्द्रियोंकी उत्पत्ति होती है। तीसरी सृष्टि भूतसर्ग है, जिसमें पंचमहाभूतोंको उत्पन्न करनेवाला तन्मात्रवर्ग रहता है॥ १५॥✎ 242243244245
द्वितीयस्त्वहमो यत्र द्रव्यज्ञानक्रियोदयः।
भूतसर्गस्तृतीयस्तु तन्मात्रो द्रव्यशक्तिमान्॥ १५
दूसरी सृष्टि अहंकारकी है, जिससे पृथ्वी आदि पंचभूत एवं ज्ञानेन्द्रिय और कर्मेन्द्रियोंकी उत्पत्ति होती है। तीसरी सृष्टि भूतसर्ग है, जिसमें पंचमहाभूतोंको उत्पन्न करनेवाला तन्मात्रवर्ग रहता है॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.10.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 279) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/10/15/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
#242 शब्दोंके बीचका स्थान: सृष्टियोंकाभी → सृष्टियोंका भी