और इसका प्रलय काल, द्रव्य तथा गुणोंके द्वारा तीन प्रकारसे होता है। (अब पहले मैं दस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन करता हूँ) पहली सृष्टि महत्तत्त्वकी है। भगवान्की प्रेरणासे सत्त्वादि गुणोंमें विषमता होना ही इसका स्वरूप है॥ १४॥✎ 242243244245
कालद्रव्यगुणैरस्य त्रिविधः प्रतिसंक्रमः।
आद्यस्तु महतः सर्गो गुणवैषम्यमात्मनः॥ १४
और इसका प्रलय काल, द्रव्य तथा गुणोंके द्वारा तीन प्रकारसे होता है। (अब पहले मैं दस प्रकारकी सृष्टिका वर्णन करता हूँ) पहली सृष्टि महत्तत्त्वकी है। भगवान्की प्रेरणासे सत्त्वादि गुणोंमें विषमता होना ही इसका स्वरूप है॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.10.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 279) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/10/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
#242 शब्दोंके बीचका स्थान: सृष्टियोंकाभी → सृष्टियोंका भी