यह जगत् जैसा अब है वैसा ही पहले था और भविष्यमें भी वैसा ही रहेगा। इसकी सृष्टि नौ प्रकारकी होती है तथा प्राकृत-वैकृत-भेदसे एक दसवीं सृष्टि और भी है॥ १३॥✎ 242243244245
यथेदानीं तथाग्रे च पश्चादप्येतदीदृशम्।
सर्गो नवविधस्तस्य प्राकृतो वैकृतस्तु यः॥ १३
यह जगत् जैसा अब है वैसा ही पहले था और भविष्यमें भी वैसा ही रहेगा। इसकी सृष्टि नौ प्रकारकी होती है तथा प्राकृत-वैकृत-भेदसे एक दसवीं सृष्टि और भी है॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.10.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 279) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/10/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
#242 शब्दोंके बीचका स्थान: सृष्टियोंकाभी → सृष्टियोंका भी