चौथी सृष्टि इन्द्रियोंकी है, यह ज्ञान और क्रियाशक्तिसे सम्पन्न होती है। पाँचवीं सृष्टि सात्त्विक अहंकारसे उत्पन्न हुए इन्द्रियाधिष्ठाता देवताओंकी है, मन भी इसी सृष्टिके अन्तर्गत है॥ १६॥✎ 242243244245
चतुर्थ ऐन्द्रियः सर्गो यस्तु ज्ञानक्रियात्मकः।
वैकारिको देवसर्गः पञ्चमो यन्मयं मनः॥ १६
चौथी सृष्टि इन्द्रियोंकी है, यह ज्ञान और क्रियाशक्तिसे सम्पन्न होती है। पाँचवीं सृष्टि सात्त्विक अहंकारसे उत्पन्न हुए इन्द्रियाधिष्ठाता देवताओंकी है, मन भी इसी सृष्टिके अन्तर्गत है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 3.10.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 279) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/3/10/16/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
#242 शब्दोंके बीचका स्थान: सृष्टियोंकाभी → सृष्टियोंका भी