जो लोग उनकी लीलाओंका श्रद्धाके साथ नित्य श्रवण और कथन करते हैं, उनके हृदयमें थोड़े ही समयमें भगवान् प्रकट हो जाते हैं॥ ४॥
शृण्वतः श्रद्धया नित्यं गृणतश्च स्वचेष्टितम्।
कालेन नातिदीर्घेण भगवान् विशते हृदि॥ ४
जो लोग उनकी लीलाओंका श्रद्धाके साथ नित्य श्रवण और कथन करते हैं, उनके हृदयमें थोड़े ही समयमें भगवान् प्रकट हो जाते हैं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.8.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 219) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/8/4/