श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.8.3

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

कथयस्व महाभाग यथाहमखिलात्मनि।

कृष्णे निवेश्य निःसङ्गं मनस्त्यक्ष्ये कलेवरम्॥ ३

kathayasva mahābhāga yathāhamakhilātmani|

kṛṣṇe niveśya niḥsaṅgaṃ manastyakṣye kalevaram|| 3

अर्थ

महाभाग्यवान् शुकदेवजी! आप मुझे ऐसा उपदेश कीजिये कि मैं अपने आसक्तिरहित मनको सर्वात्मा भगवान् श्रीकृष्णमें तन्मय करके अपना शरीर छोड़ सकूँ॥ ३॥✎ 165

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #165 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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