उनकी पीठसे पराजय, अधर्म और अज्ञान, नाड़ियोंसे नद-नदी और हड्डियोंसे पर्वतोंका निर्माण हुआ है॥ ९॥✎ 12901291
पराभूतेरधर्मस्य तमसश्चापि पश्चिमः।
नाड्यो नदनदीनां तु गोत्राणामस्थिसंहतिः॥ ९
उनकी पीठसे पराजय, अधर्म और अज्ञान, नाड़ियोंसे नद-नदी और हड्डियोंसे पर्वतोंका निर्माण हुआ है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 204) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/6/9/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1290 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
#1291 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,