नारद! हम, तुम, धर्म, सनकादि, शंकर, विज्ञान और अन्तःकरण—सब-के-सब उनके चित्तके आश्रित हैं॥ ११॥✎ 12901291
धर्मस्य मम तुभ्यं च कुमाराणां भवस्य च।
विज्ञानस्य च सत्त्वस्य परस्यात्मा परायणम्॥ ११
नारद! हम, तुम, धर्म, सनकादि, शंकर, विज्ञान और अन्तःकरण—सब-के-सब उनके चित्तके आश्रित हैं॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.6.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 204) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/6/11/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1290 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ति, → निऋर्ऋति,
#1291 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): निऋर्ऋति, → निर्ऋति,