यह कार्यरूप सम्पूर्ण विश्व जो कुछ कभी था, है या होगा—सब-का-सब जिसमें दीख पड़ता है वही भगवान्का स्थूल-से-स्थूल और विराट् शरीर है॥ २४॥
विशेषस्तस्य देहोऽयं स्थविष्ठश्च स्थवीयसाम्।
यत्रेदं दृश्यते विश्वं भूतं भव्यं भवच्च सत्॥ २४
यह कार्यरूप सम्पूर्ण विश्व जो कुछ कभी था, है या होगा—सब-का-सब जिसमें दीख पड़ता है वही भगवान्का स्थूल-से-स्थूल और विराट् शरीर है॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.1.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 183) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/1/24/