परीक्षित्ने पूछा—ब्रह्मन्! धारणा किस साधनसे किस वस्तुमें किस प्रकार की जाती है और उसका क्या स्वरूप माना गया है, जो शीघ्र ही मनुष्यके मनका मैल मिटा देती है?॥ २२॥
यथा सन्धार्यते ब्रह्मन् धारणा यत्र सम्मता।
यादृशी वा हरेदाशु पुरुषस्य मनोमलम्॥ २२
परीक्षित्ने पूछा—ब्रह्मन्! धारणा किस साधनसे किस वस्तुमें किस प्रकार की जाती है और उसका क्या स्वरूप माना गया है, जो शीघ्र ही मनुष्यके मनका मैल मिटा देती है?॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 2.1.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 183) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/2/1/22/