श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 2.1.22

द्वितीय स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

राजोवाच

यथा सन्धार्यते ब्रह्मन् धारणा यत्र सम्मता।

यादृशी वा हरेदाशु पुरुषस्य मनोमलम्॥ २२

yathā sandhāryate brahman dhāraṇā yatra sammatā|

yādṛśī vā haredāśu puruṣasya manomalam|| 22

अर्थ

परीक्षित‍्ने पूछा—ब्रह्मन्! धारणा किस साधनसे किस वस्तुमें किस प्रकार की जाती है और उसका क्या स्वरूप माना गया है, जो शीघ्र ही मनुष्यके मनका मैल मिटा देती है?॥ २२॥

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