॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.8.47
तस्मै नमो भगवते पुरुषाय भूम्ने
विश्वाय विश्वगुरवे परदेवतायै।
नारायणाय ऋषये च नरोत्तमाय
हंसाय संयतगिरे निगमेश्वराय॥ ४७
tasmai namo bhagavate puruṣāya bhūmne
viśvāya viśvagurave paradevatāyai|
nārāyaṇāya ṛṣaye ca narottamāya
haṃsāya saṃyatagire nigameśvarāya|| 47
अर्थ
भगवन्! आप अन्तर्यामी, सर्वव्यापक, सर्वस्वरूप, जगद्गुरु परमाराध्य और शुद्धस्वरूप हैं। समस्त लौकिक और वैदिक वाणी आपके अधीन है। आप ही वेदमार्गके प्रवर्तक हैं। मैं आपके इस युगल स्वरूप नरोत्तम नर और ऋषिवर नारायणको नमस्कार करता हूँ॥ ४७॥