सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! राजा परीक्षित्ने भगवान् श्रीशुकदेवजीसे इस प्रकार कहकर बड़े प्रेमसे उनकी पूजा की। अब वे परीक्षित्से विदा लेकर समागत त्यागी महात्माओं, भिक्षुओंके साथ वहाँसे चले गये॥ ८॥
इत्युक्तस्तमनुज्ञाप्य भगवान् बादरायणिः।
जगाम भिक्षुभिः साकं नरदेवेन पूजितः॥ ८
सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! राजा परीक्षित्ने भगवान् श्रीशुकदेवजीसे इस प्रकार कहकर बड़े प्रेमसे उनकी पूजा की। अब वे परीक्षित्से विदा लेकर समागत त्यागी महात्माओं, भिक्षुओंके साथ वहाँसे चले गये॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 933) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/8/