श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.78

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

उदीच्याः सामगाः शिष्या आसन् पंचशतानि वै।

पौष्यञ्ज्यावन्त्ययोश्‍चापि तांश्‍च प्राच्यान् प्रचक्षते॥ ७८

udīcyāḥ sāmagāḥ śiṣyā āsan paṃcaśatāni vai|

pauṣyañjyāvantyayoścāpi tāṃśca prācyān pracakṣate|| 78

अर्थ

पौष्यंजि और आवन्त्यके पाँच सौ शिष्य थे। वे उत्तर दिशाके निवासी होनेके कारण औदीच्य सामवेदी कहलाते थे। उन्हींको प्राच्य सामवेदी भी कहते हैं। उन्होंने एक-एक संहिताका अध्ययन किया॥ ७८॥

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