श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.60

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

बह्वृचाः संहिता ह्येता एभिर्ब्रह्मर्षिभिर्धृताः।

श्रुत्वैतच्छन्दसां व्यासं सर्वपापैः प्रमुच्यते॥ ६०

bahvṛcāḥ saṃhitā hyetā ebhirbrahmarṣibhirdhṛtāḥ|

śrutvaitacchandasāṃ vyāsaṃ sarvapāpaiḥ pramucyate|| 60

अर्थ

इन ब्रह्मर्षियोंने पूर्वोक्त सम्प्रदायके अनुसार ऋग्वेदसम्बन्धी बह्वृच शाखाओंको धारण किया। जो मनुष्य यह वेदोंके विभाजनका इतिहास श्रवण करता है, वह सब पापोंसे छूट जाता है॥ ६०॥

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