श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.59

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

बाष्कलिः प्रतिशाखाभ्यो वालखिल्याख्यसंहिताम्।

चक्रे बालायनिर्भज्यः कासारश्‍चैव तां दधुः॥ ५९

bāṣkaliḥ pratiśākhābhyo vālakhilyākhyasaṃhitām|

cakre bālāyanirbhajyaḥ kāsāraścaiva tāṃ dadhuḥ|| 59

अर्थ

बाष्कलके पुत्र बाष्कलिने सब शाखाओंसे एक ‘वालखिल्य’ नामकी शाखा रची। उसे बालायनि, भज्य एवं कासारने ग्रहण किया॥ ५९॥

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