श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.6.20

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

पारीक्षित इति श्रुत्वा प्राहर्त्विज उदारधीः।

सहेन्द्रस्तक्षको विप्रा ना‌ग्‍नौ किमिति पात्यते॥ २०

pārīkṣita iti śrutvā prāhartvija udāradhīḥ|

sahendrastakṣako viprā nāgnau kimiti pātyate|| 20

अर्थ

परीक्षित्‍नन्दन जनमेजय बड़े ही बुद्धिमान् और वीर थे। उन्होंने ब्राह्मणोंकी बात सुनकर ऋत्विजोंसे कहा कि ‘ब्राह्मणो! आपलोग इन्द्रके साथ तक्षकको क्यों नहीं अग्‍निमें गिरा देते?’॥ २०॥

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