राजर्षि परीक्षित् तक्षकके डसनेके पहले ही ब्रह्ममें स्थित हो चुके थे। अब तक्षकके विषकी आगसे उनका शरीर सबके सामने ही जलकर भस्म हो गया॥ १३॥✎ 14551456
ब्रह्मभूतस्य राजर्षेर्देहोऽहिगरलाग्निना।
बभूव भस्मसात् सद्यः पश्यतां सर्वदेहिनाम्॥ १३
राजर्षि परीक्षित् तक्षकके डसनेके पहले ही ब्रह्ममें स्थित हो चुके थे। अब तक्षकके विषकी आगसे उनका शरीर सबके सामने ही जलकर भस्म हो गया॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.6.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 934) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/6/13/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1455 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित्को → परीक्षित्को
#1456 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): पराक्षित्को → परीक्षित्को