कुरुश्रेष्ठ! आगे चलकर जब शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य क्षेत्रमें बहुत बड़ा सत्र करेंगे, तब उनके प्रश्न करनेपर पौराणिक वक्ता श्रीसूतजी उन लोगोंको इस संहिताका श्रवण करायेंगे॥ ४३॥
एतां वक्ष्यत्यसौ सूत ऋषिभ्यो नैमिषालये।
दीर्घसत्रे कुरुश्रेष्ठ सम्पृष्टः शौनकादिभिः॥ ४३
कुरुश्रेष्ठ! आगे चलकर जब शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य क्षेत्रमें बहुत बड़ा सत्र करेंगे, तब उनके प्रश्न करनेपर पौराणिक वक्ता श्रीसूतजी उन लोगोंको इस संहिताका श्रवण करायेंगे॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.4.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 930) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/4/43/