श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.4.43

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एतां वक्ष्यत्यसौ सूत ऋषिभ्यो नैमिषालये।

दीर्घसत्रे कुरुश्रेष्ठ सम्पृष्टः शौनकादिभिः॥ ४३

etāṃ vakṣyatyasau sūta ṛṣibhyo naimiṣālaye|

dīrghasatre kuruśreṣṭha sampṛṣṭaḥ śaunakādibhiḥ|| 43

अर्थ

कुरुश्रेष्ठ! आगे चलकर जब शौनकादि ऋषि नैमिषारण्य क्षेत्रमें बहुत बड़ा सत्र करेंगे, तब उनके प्रश्‍न करनेपर पौराणिक वक्ता श्रीसूतजी उन लोगोंको इस संहिताका श्रवण करायेंगे॥ ४३॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां द्वादशस्कन्धे चतुर्थोऽध्यायः॥ ४॥

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