॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.3.31
यस्मात् क्षुद्रदृशो मर्त्याः क्षुद्रभाग्या महाशनाः।
कामिनो वित्तहीनाश्च स्वैरिण्यश्च स्त्रियोऽसतीः॥ ३१
yasmāt kṣudradṛśo martyāḥ kṣudrabhāgyā mahāśanāḥ|
kāmino vittahīnāśca svairiṇyaśca striyo'satīḥ|| 31
अर्थ
जब कलियुगका राज्य होता है, तब लोगोंकी दृष्टि क्षुद्र हो जाती है; अधिकांश लोग होते तो हैं अत्यन्त निर्धन, परन्तु खाते हैं बहुत अधिक। उनका भाग्य तो होता है बहुत ही मन्द और चित्तमें कामनाएँ होती हैं बहुत बड़ी-बड़ी। स्त्रियोंमें दुष्टता और कुलटापनकी वृद्धि हो जाती है॥ ३१॥✎ 1453