श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.2.24

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

यदा चन्द्रश्‍च सूर्यश्‍च तथा तिष्यबृहस्पती।

एकराशौ समेष्यन्ति तदा भवति तत् कृतम्॥ २४

yadā candraśca sūryaśca tathā tiṣyabṛhaspatī|

ekarāśau sameṣyanti tadā bhavati tat kṛtam|| 24

अर्थ

जिस समय चन्द्रमा, सूर्य और बृहस्पति एक ही समय एक ही साथ पुष्य नक्षत्रके प्रथम पलमें प्रवेश करके एक राशिपर आते हैं, उसी समय सत्ययुगका प्रारम्भ होता है॥ २४॥

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