॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 12.13.11
आदिमध्यावसानेषु वैराग्याख्यानसंयुतम्।
हरिलीलाकथाव्रातामृतानन्दितसत्सुरम् ॥ ११
ādimadhyāvasāneṣu vairāgyākhyānasaṃyutam|
harilīlākathāvrātāmṛtānanditasatsuram || 11
अर्थ
इसके आदि, मध्य और अन्तमें वैराग्य उत्पन्न करनेवाली बहुत-सी कथाएँ हैं। इस महापुराणमें जो भगवान् श्रीहरिकी लीला-कथाएँ हैं, वे तो अमृतस्वरूप हैं ही; उनके सेवनसे सत्पुरुष और देवताओंको बड़ा ही आनन्द मिलता है॥ ११॥