श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.12.31

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

व्रतचर्या तु कन्यानां यत्र तुष्टोऽच्युतो व्रतैः।

प्रसादो यज्ञपत्‍नीभ्यो विप्राणां चानुतापनम्॥ ३१

vratacaryā tu kanyānāṃ yatra tuṣṭo'cyuto vrataiḥ|

prasādo yajñapatnībhyo viprāṇāṃ cānutāpanam|| 31

अर्थ

इसके बाद गोपियोंने भगवान्‌को पतिरूपसे प्राप्त करनेके लिये व्रत किया और भगवान् श्रीकृष्णने प्रसन्‍न होकर उन्हें अभिमत वर दिया। भगवान्‌ने यज्ञपत्‍नियोंपर कृपा की। उनके पतियों—ब्राह्मणोंको बड़ा पश्‍चत्ताप हुआ॥ ३१॥

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