श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.12.29

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तृणावर्तस्य निष्पेषस्तथैव बकवत्सयोः।

धेनुकस्य सहभ्रातुः प्रलम्बस्य च संक्षयः॥ २९

tṛṇāvartasya niṣpeṣastathaiva bakavatsayoḥ|

dhenukasya sahabhrātuḥ pralambasya ca saṃkṣayaḥ|| 29

अर्थ

तृणावर्त, बकासुर एवं वत्सासुरको पीस डाला। सपरिवार धेनुकासुर और प्रलम्बासुरको मार डाला॥ २९॥

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