॥ श्रीहरिः ॥
बिभर्ति सांख्यं योगं च देवो मकरकुण्डले।
मौलिं पदं पारमेष्ठ्यं सर्वलोकाभयंकरम्॥ १२
bibharti sāṃkhyaṃ yogaṃ ca devo makarakuṇḍale|
mauliṃ padaṃ pārameṣṭhyaṃ sarvalokābhayaṃkaram|| 12
अर्थ
देवाधिदेव भगवान् सांख्य और योगरूप मकराकृत कुण्डल तथा सब लोकोंको अभय करनेवाले ब्रह्मलोकको ही मुकुटके रूपमें धारण करते हैं॥ १२॥
बिभर्ति सांख्यं योगं च देवो मकरकुण्डले।
मौलिं पदं पारमेष्ठ्यं सर्वलोकाभयंकरम्॥ १२
देवाधिदेव भगवान् सांख्य और योगरूप मकराकृत कुण्डल तथा सब लोकोंको अभय करनेवाले ब्रह्मलोकको ही मुकुटके रूपमें धारण करते हैं॥ १२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.11.12 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 965) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/11/12/