शौनकजीने कहा—सूतजी! आप भगवान्के परमभक्त और बहुज्ञोंमें शिरोमणि हैं। हमलोग समस्त शास्त्रोंके सिद्धान्तके सम्बन्धमें आपसे एक विशेष प्रश्न पूछना चाहते हैं, क्योंकि आप उसके मर्मज्ञ हैं॥ १॥
अथेममर्थं पृच्छामो भवन्तं बहुवित्तमम्।
समस्ततन्त्रराद्धान्ते भवान् भागवततत्त्ववित्॥ १
शौनकजीने कहा—सूतजी! आप भगवान्के परमभक्त और बहुज्ञोंमें शिरोमणि हैं। हमलोग समस्त शास्त्रोंके सिद्धान्तके सम्बन्धमें आपसे एक विशेष प्रश्न पूछना चाहते हैं, क्योंकि आप उसके मर्मज्ञ हैं॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.11.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 964) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/11/1/