श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.10.7

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अथापि संवदिष्यामो भवान्येतेन साधुना।

अयं हि परमो लाभो नृणां साधुसमागमः॥ ७✎ 1245

athāpi saṃvadiṣyāmo bhavānyetena sādhunā|

ayaṃ hi paramo lābho nṛṇāṃ sādhusamāgamaḥ|| 7

अर्थ

प्रिये! यद्यपि इन्हें हमारी कोई आवश्यकता नहीं है, फिर भी मैं इनके साथ बातचीत करूँगा; क्योंकि ये महात्मा पुरुष हैं। जीवमात्रके लिये सबसे बड़े लाभकी बात यही है कि संत पुरुषोंका समागम प्राप्त हो॥ ७॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1245 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नॄणां → नृणां

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