वे चिरकालतक विष्णुभगवान्की मायासे भटक चुके थे और बहुत थके हुए भी थे। भगवान् शिवकी कल्याणी वाणीका अमृतपान करनेसे उनके सारे क्लेश नष्ट हो गये। उन्होंने भगवान् शंकरसे इस प्रकार कहा॥ २७॥
स चिरं मायया विष्णोर्भ्रामितः कर्शितो भृशम्।
शिववागमृतध्वस्तक्लेशपुंजस्तमब्रवीत्॥ २७
वे चिरकालतक विष्णुभगवान्की मायासे भटक चुके थे और बहुत थके हुए भी थे। भगवान् शिवकी कल्याणी वाणीका अमृतपान करनेसे उनके सारे क्लेश नष्ट हो गये। उन्होंने भगवान् शंकरसे इस प्रकार कहा॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.10.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 962) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/10/27/