श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 12.1.35

द्वादश स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एककाला इमे भूपाः सप्तान्ध्राः सप्त कोसलाः।

विदूरपतयो भाव्या निषधास्तत एव हि॥ ३५

ekakālā ime bhūpāḥ saptāndhrāḥ sapta kosalāḥ|

vidūrapatayo bhāvyā niṣadhāstata eva hi|| 35

अर्थ

परीक्षित्! बाह्लिकवंशी नरपति एक साथ ही विभिन्‍न प्रदेशोंमें राज्य करेंगे। उनमें सात अन्ध्रदेशके तथा सात ही कोसलदेशके अधिपति होंगे, कुछ विदूर-भूमिके शासक और कुछ निषधदेशके स्वामी होंगे॥ ३५॥

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