महापद्म पृथ्वीका एकच्छत्र शासक होगा। उसके शासनका उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकेगा। क्षत्रियोंके विनाशमें हेतु होनेकी दृष्टिसे तो उसे दूसरा परशुराम ही समझना चाहिये॥ १०॥
स एकच्छत्रां पृथिवीमनुल्लंघितशासनः।
शासिष्यति महापद्मो द्वितीय इव भार्गवः॥ १०
महापद्म पृथ्वीका एकच्छत्र शासक होगा। उसके शासनका उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकेगा। क्षत्रियोंके विनाशमें हेतु होनेकी दृष्टिसे तो उसे दूसरा परशुराम ही समझना चाहिये॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 12.1.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 908) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/12/1/10/