श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.30

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

पिंगलोवाच

अहो मे मोहविततिं पश्यताविजितात्मनः।

या कान्तादसतः कामं कामये येन बालिशा॥ ३०

aho me mohavitatiṃ paśyatāvijitātmanaḥ|

yā kāntādasataḥ kāmaṃ kāmaye yena bāliśā|| 30

अर्थ

पिंगलाने यह गीत गाया था—हाय! हाय! मैं इन्द्रियोंके अधीन हो गयी। भला! मेरे मोहका विस्तार तो देखो, मैं इन दुष्ट पुरुषोंसे, जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं है, विषयसुखकी लालसा करती हूँ। कितने दुःखकी बात है! मैं सचमुच मूर्ख हूँ॥ ३०॥

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