श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.23

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

सा स्वैरिण्येकदा कान्तं संकेत उपनेष्यती।

अभूत् काले बहिर्द्वारि बिभ्रती रूपमुत्तमम्॥ २३

sā svairiṇyekadā kāntaṃ saṃketa upaneṣyatī|

abhūt kāle bahirdvāri bibhratī rūpamuttamam|| 23

अर्थ

वह स्वेच्छाचारिणी तो थी ही, रूपवती भी थी। एक दिन रात्रिके समय किसी पुरुषको अपने रमणस्थानमें लानेके लिये खूब बन-ठनकर—उत्तम वस्त्राभूषणोंसे सजकर बहुत देरतक अपने घरके बाहरी दरवाजेपर खड़ी रही॥ २३॥

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