श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.8.18

एकादश स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

नृत्यवादित्रगीतानि जुषन् ग्राम्याणि योषिताम्।

आसां क्रीडनको वश्य ऋष्यशृंगो मृगीसुतः॥ १८

nṛtyavāditragītāni juṣan grāmyāṇi yoṣitām|

āsāṃ krīḍanako vaśya ṛṣyaśṛṃgo mṛgīsutaḥ|| 18

अर्थ

तुम्हें इस बातका पता है कि हरिनीके गर्भसे पैदा हुए ऋष्यशृंग मुनि स्त्रियोंका विषय-सम्बन्धी गाना-बजाना, नाचना आदि देख-सुनकर उनके वशमें हो गये थे और उनके हाथकी कठपुतली बन गये थे॥ १८॥

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