जब मैं इस पृथ्वीका त्याग कर दूँ तब तुम इसपर मत रहना; क्योंकि साधु उद्धव! कलियुगमें अधिकांश लोगोंकी रुचि अधर्ममें ही होगी॥ ५॥
न वस्तव्यं त्वयैवेह मया त्यक्ते महीतले।
जनोऽधर्मरुचिर्भद्र भविष्यति कलौ युगे॥ ५
जब मैं इस पृथ्वीका त्याग कर दूँ तब तुम इसपर मत रहना; क्योंकि साधु उद्धव! कलियुगमें अधिकांश लोगोंकी रुचि अधर्ममें ही होगी॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.7.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 752) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/7/5/