श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! समस्त देवताओं और भगवान् शंकरके साथ ब्रह्माजीने इस प्रकार भगवान्की स्तुति की। इसके बाद वे प्रणाम करके अपने धाममें जानेके लिये आकाशमें स्थित होकर भगवान्से इस प्रकार कहने लगे॥ २०॥✎ 904
इत्यभिष्टूय विबुधैः सेशः शतधृतिर्हरिम्।
अभ्यभाषत गोविन्दं प्रणम्याम्बरमाश्रितः॥ २०
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! समस्त देवताओं और भगवान् शंकरके साथ ब्रह्माजीने इस प्रकार भगवान्की स्तुति की। इसके बाद वे प्रणाम करके अपने धाममें जानेके लिये आकाशमें स्थित होकर भगवान्से इस प्रकार कहने लगे॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.6.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 748) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/6/20/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)