॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.5.30
नारायणाय ऋषये पुरुषाय महात्मने।
विश्वेश्वराय विश्वाय सर्वभूतात्मने नमः॥ ३०
nārāyaṇāya ṛṣaye puruṣāya mahātmane|
viśveśvarāya viśvāya sarvabhūtātmane namaḥ|| 30
अर्थ
वे लोग इस प्रकार भगवान्की स्तुति करते हैं—‘हे ज्ञानस्वरूप भगवान् वासुदेव एवं क्रियाशक्तिरूप संकर्षण! हम आपको बार-बार नमस्कार करते हैं। भगवान् प्रद्युम्न और अनिरुद्धके रूपमें हम आपको नमस्कार करते हैं। ऋषि नारायण, महात्मा नर, विश्वेश्वर, विश्वरूप और सर्वभूतात्मा भगवान्को हम नमस्कार करते हैं॥ २९-३०॥