श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.4.23

एकादश स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

एवंविधानि कर्माणि जन्मानि च जगत्पतेः।

भूरीणि भूरियशसो वर्णितानि महाभुज॥ २३

evaṃvidhāni karmāṇi janmāni ca jagatpateḥ|

bhūrīṇi bhūriyaśaso varṇitāni mahābhuja|| 23

अर्थ

महाबाहु विदेहराज! भगवान्‌की कीर्ति अनन्त है। महात्माओंने जगत्पति भगवान्‌के ऐसे-ऐसे अनेकों जन्म और कर्मोंका प्रचुरतासे गान भी किया है॥ २३॥✎ 1729

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामेकादशस्कन्धे चतुर्थोऽध्यायः॥ ४॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1729 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: हैहय-वंशका → हैहयवंशका

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