श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 11.31.24

एकादश स्कन्ध · अध्याय 31 · अथैकत्रिंशोऽध्यायः

नित्यं सन्‍निहितस्तत्र भगवान् मधुसूदनः।

स्मृत्याशेषाशुभहरं सर्वमंगलमंगलम्॥ २४

nityaṃ sannihitastatra bhagavān madhusūdanaḥ|

smṛtyāśeṣāśubhaharaṃ sarvamaṃgalamaṃgalam|| 24

अर्थ

भगवान् श्रीकृष्ण वहाँ अब भी सदा-सर्वदा निवास करते हैं। वह स्थान स्मरणमात्रसे ही सारे पाप-तापोंका नाश करनेवाला और सर्वमंगलोंको भी मंगल बनानेवाला है॥ २४॥✎ 1778

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1778 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: देने-वाला → देनेवाला

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