vadanti tasya te viṣṇo mayāsādhu kṛtaṃ prabho|| 36
अर्थ
सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान् प्रभो! महात्मालोग कहा करते हैं कि आपके स्मरणमात्रसे मनुष्योंका अज्ञानान्धकार नष्ट हो जाता है। बड़े खेदकी बात है कि मैंने स्वयं आपका ही अनिष्ट कर दिया॥ ३६॥
यस्यानुस्मरणं नॄणामज्ञानध्वान्तनाशनम्।
वदन्ति तस्य ते विष्णो मयासाधु कृतं प्रभो॥ ३६
सर्वव्यापक सर्वशक्तिमान् प्रभो! महात्मालोग कहा करते हैं कि आपके स्मरणमात्रसे मनुष्योंका अज्ञानान्धकार नष्ट हो जाता है। बड़े खेदकी बात है कि मैंने स्वयं आपका ही अनिष्ट कर दिया॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.30.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 901) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/30/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1236 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): नृणामज्ञानध्वान्तनाशनम्। → नॄणामज्ञानध्वान्तनाशनम्।