॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.30.34
चतुर्भुजं तं पुरुषं दृष्ट्वा स कृतकिल्बिषः।
भीतः पपात शिरसा पादयोरसुरद्विषः॥ ३४
caturbhujaṃ taṃ puruṣaṃ dṛṣṭvā sa kṛtakilbiṣaḥ|
bhītaḥ papāta śirasā pādayorasuradviṣaḥ|| 34
अर्थ
जब वह पास आया, तब उसने देखा कि ‘अरे! ये तो चतुर्भुज पुरुष हैं।’ अब तो वह अपराध कर चुका था, इसलिये डरके मारे काँपने लगा और दैत्यदलन भगवान् श्रीकृष्णके चरणोंपर सिर रखकर धरतीपर गिर पड़ा॥ ३४॥