॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 11.30.31
कटिसूत्रब्रह्मसूत्रकिरीटकटकांगदैः ।
हारनूपुरमुद्राभिः कौस्तुभेन विराजितम्॥ ३१
kaṭisūtrabrahmasūtrakirīṭakaṭakāṃgadaiḥ |
hāranūpuramudrābhiḥ kaustubhena virājitam|| 31
अर्थ
कमरमें करधनी, कंधेपर यज्ञोपवीत, माथेपर मुकुट, कलाइयोंमें कंगन, बाँहोंमें बाजूबंद, वक्षःस्थलपर हार, चरणोंमें नूपुर, अँगुलियोंमें अँगूठियाँ और गलेमें कौस्तुभमणि शोभायमान हो रही थी॥ ३१॥✎ 1774