काम-क्रोध आदि विघ्नोंको मेरे चिन्तन और नाम-संकीर्तन आदिके द्वारा नष्ट करना चाहिये। तथा पतनकी ओर ले जानेवाले दम्भ-मद आदि विघ्नोंको धीरे-धीरे महापुरुषोंकी सेवाके द्वारा दूर कर देना चाहिये॥ ४०॥
कांश्चिन्ममानुध्यानेन नामसंकीर्तनादिभिः।
योगेश्वरानुवृत्त्या वा हन्यादशुभदाञ्छनैः॥ ४०
काम-क्रोध आदि विघ्नोंको मेरे चिन्तन और नाम-संकीर्तन आदिके द्वारा नष्ट करना चाहिये। तथा पतनकी ओर ले जानेवाले दम्भ-मद आदि विघ्नोंको धीरे-धीरे महापुरुषोंकी सेवाके द्वारा दूर कर देना चाहिये॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 11.28.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 890) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/11/28/40/